काेराेना महामारी संकट के कारण स्कूल बंद हाेने से ऑनलाइनपढ़ाई बढ़ गई है।ऐसेमें बच्चाें काे घंटाें तक कम्प्यूटर, लैपटाॅप या मोबाइल फोन पर समय नहीं बिताना पड़े और उनकी पढ़ाई भी हाेती रहे, इसे ध्यान में रखकर केंद्र सरकार दिशा-निर्देश बनाने पर काम रही है।
जिनके पास संसाधान नहीं, उनकी शिकायतों पर भी हो रहा काम
मानव संसाधन विकास मंत्रालय इस पर काम कर रहा है।छात्रों को डिजिटल कक्षाओं के लिए घंटों तक कंप्यूटर, लैपटाॅप या मोबाइल फोन पर समय बिताने की चुनाैती से निपटने के उपाय शामिल किए जाएंगे। यह भी ध्यान में रखा जाएगा कि बच्चाें के सीखने की प्रक्रिया चलती रहे। मंत्रालय उन छात्राें की समस्याओंपर भी गाैर कर रहा है, जिनके पास कंप्यूटर, लैपटाॅप या स्मार्ट फाेन नहीं हैं।
अभिभावकों ने की थी घंटों ऑनलाइन क्लास चलने की शिकायत
अधिकारियों ने बताया कि ऑनलाइन कक्षाओं में बच्चों के स्क्रीन के सामने अधिक समय तक रहने संबंधी माता-पिता की शिकायताें काे देखते हुए दिशा-निर्देश पर काम किया जा रहा है। अधिकारी ने कहा, "ऑनलाइन कक्षाओं के लिए निश्चित समयावधि तय की जाएगी, ताकि बच्चों को लंबे वक्त तक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के सामने बैठना नहीं पड़े।
इन चुनाैतियाें काे ध्यान में रखकर तैयार की जा रही गाइडलाइन
- कई लोगों के घरों में एक ही इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, दूसरा बच्चा हाे ताे ऑनलाइन पढ़ाई के लिए क्या करे?
- सामान्य ताैर पर स्कूल परिसर में बच्चों को मोबाइल फोन रखने की अनुमति नहीं हाेती, लेकिन अब बच्चे पूरे दिन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर निर्भर हैं, इसमें संतुलन कैसे बने?
- बच्चाें की सेहत खासताैर से आंखों पर इसका असर न हाे, इसके लिए क्या किया जाए?
- बच्चों की साइबर सुरक्षा संबंधी चिंताओं और मानसिक स्वास्थ्य काे कैसे संतुलित बनाया जाए?
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