दुनियाभर में आज का दिन ‘वर्ल्ड चिल्ड्रन डे’ के रूप में मनाया जा रहा है। यूनाइटेड नेशंस ने साल 1954 में 20 नवंबर को ‘यूनिवर्सल चिल्ड्रन डे’ के तौर पर मनाए जाने की शुरुआत की थी। इस दिन को मनाने का मकसद पूरी दुनिया के बच्चों में जागरूकता बढ़ाने और बच्चों को हितों में सुधार के लाना है। ‘वर्ल्ड चिल्ड्रन डे’ 2020 के मौके यूनिसेफ ने “एवर्टिंग ए लॉस्ट कोविड जनरेशन” नामक एक स्पेशल रिपोर्ट जारी की भी है।
572 मिलियन बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
अपनी इस रिपोर्ट में यूनिसेफ ने चेताया कि इस साल कोरोना महामारी के चलते पूरी दुनिया में बंद पड़े स्कूलों के कारण करीब 572 मिलियन बच्चे प्रभावित हुए हैं। यूनिसेफ के मुताबिक महामारी के चलते बने हालातों की वजह से दुनिया भर के बच्चों की शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इसके चलते बच्चों की एक पीढ़ी के परिपक्व होने की चुनौती पूरी दुनिया के सामने आ गई है।
कोरोना के कारण बने हालातों के चलते यूनिसेफ और सहयोगी संगठनों ने बच्चों और बाल हितों की रक्षा के लिए सभी देशों की सरकारों से छह सूत्रीय योजना अपनाने की अपील की है-
- किसी भी प्रकार के डिजिटल डिवाइड को खत्म करते हुए भी बच्चों की लर्निंग सुनिश्चित करें।
- हर बच्चे तक स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं की पहुंच के साथ ही कोरोना महामारी वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
- बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य का सपोर्ट और सुरक्षा करें। बचपन की कुप्रथाओं, लिंग-आधारित हिंसा और उपेक्षा को भी खत्म करें।
- साफ-सफाई और स्वच्छता के साथ ही साफ पानी की उपलब्धता बढ़ाएं और पर्यावरणीय गिरावट एवं जलवायु परिवर्तन के कारणों पर रोक लगाएं।
- बच्चों में बढ़ रही निर्धनता पर रोक लगाते हुए सभी तक समान लाभ सुनिश्चित करें।
- संघर्ष, आपदा और विस्थापन से प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों के संरक्षण- सहयोग के प्रयासों को दोगुना करें।
सभी वर्ग की भूमिका अहम
यूएन के मुताबिक, पेरेंट्स, टीचर्स, नर्स- डॉक्टर, सरकारी प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, धार्मिक एवं सामुदायिक प्रतिनिधि, कॉर्पोरेट हाउसेस और मीडियाकर्मियों के साथ ही स्वयं बच्चे भी विश्व बाल दिवस को सामाजिक, सामुदायिक और राष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं।
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